बिहार में न्यूक्लियर पावर प्लांट: ऊर्जा क्रांति का नया अध्याय शुरू हो रहा है! Published By Anupam Nath दोस्तों, बिहार अब ऊर्जा के क्षेत्र में बड़ा बदलाव लाने वाला है! लंबे समय से हम लोग बिजली की कमी से परेशान थे, इंडस्ट्रीज रुक जाती थीं, घरों में पंखे भी धीमे चलते थे। लेकिन अब अच्छी खबर आ रही है – बिहार में पहला nuclear power plant लगाने की तैयारियां तेजी से चल रही हैं। NPCIL (Nuclear Power Corporation of India Limited) ने प्रारंभिक सर्वे पूरा कर लिया है, और बैंक़ा जिले के शंभूगंज तथा भितरिया इलाकों को सबसे आगे माना जा रहा है। पटना के विद्युत भवन में हाल ही में हाई-लेवल मीटिंग हुई थी, जहां एनर्जी सेक्रेटरी मनोज कुमार सिंह ने अध्यक्षता की, और NPCIL तथा NTPC की टीमों ने अपनी रिपोर्ट्स शेयर कीं।यह सब 2026 में हो रहा है, जब भारत का लक्ष्य है 2047 तक 100 GW nuclear power क्षमता हासिल करना – यानी आजादी के 100 साल पूरे होने तक हम nuclear energy में बड़ा खिलाड़ी बन जाएंगे। बिहार इस मिशन का हिस्सा बन रहा है, जो राज्य के लिए बहुत बड़ा बूस्ट है। अभी तक बिहार ज्यादातर कोयला, हाइड्रो और थोड़े renewable पर निर्भर था, लेकिन nuclear जुड़ने से 24 घंटे साफ और भरोसेमंद बिजली मिलेगी।सर्वे रिपोर्ट्स के मुताबिक, बैंक़ा के ये दोनों साइट्स – शंभूगंज और भितरिया – कम आबादी वाले हैं, पथरीली जमीन भारी reactor structures के लिए परफेक्ट है। ये साइट्स नवादा के राजौली और सिवान के संभावित लोकेशन्स से बेहतर निकले हैं। राजौली तो पहले से ही फ्रंट-रनर है पहले प्लांट के लिए, जहां Small Modular Reactor (SMR) टेक्नोलॉजी यूज होगी, क्षमता लगभग 2000 MW, और अनुमानित लागत 20,000 करोड़ रुपये के आसपास। वहां फुलवरिया रिजर्वॉयर से पानी की सप्लाई का मजबूत प्लान है, जो फ्लोराइड-फ्री पानी भी 90 गांवों को देता है।लेकिन बैंक़ा में भी मजबूत केस बन रहा है। NPCIL और NTPC ने कई साइट्स चेक कीं – बैंक़ा, नवादा, सिवान – और अब फाइनल डिसीजन सेंटर गवर्नमेंट के हाथ में है। बिहार सरकार उम्मीद कर रही है कि निर्माण 2027-28 से शुरू हो सकता है। यह joint venture है NPCIL और NTPC का, और राज्य की BSPGCL (Bihar State Power Generation Company Limited) भी पूरी तरह शामिल है।सबसे महत्वपूर्ण चुनौती है पानी की सप्लाई, क्योंकि nuclear reactor को लगातार ठंडा रखने के लिए बहुत ज्यादा पानी चाहिए। चुनी गई साइट्स पर नैचुरल परमानेंट सोर्स सीमित है, इसलिए विकल्प चर्चा में हैं। सबसे अच्छा विकल्प है गंगा नदी से पाइपलाइन बनाकर पानी लाना – गंगा तो बिहार के लिए सबसे भरोसेमंद और भरपूर स्रोत है। दूसरा आइडिया नेपाल बॉर्डर की नदियों पर बड़े रिजर्वॉयर बनाना। अधिकारी कह रहे हैं कि गंगा पाइपलाइन सबसे प्रैक्टिकल, कम खर्च वाला और लॉन्ग-टर्म सॉल्यूशन होगा। हाल की मीटिंग में वॉटर रिसोर्सेज डिपार्टमेंट ने भी इस पर फोकस किया था।सिवान जिले में सर्वे अभी चल रहा है, लेकिन वहां seismic zone होने की वजह से एक्स्ट्रा सेफ्टी ऑडिट और चेक की जरूरत पड़ेगी। Nuclear projects में सेफ्टी जीरो कम्प्रोमाइज वाली चीज है – भूकंप प्रतिरोध, रेडिएशन प्रोटेक्शन, पर्यावरण प्रभाव, आबादी निकासी प्लान – सब कुछ वर्ल्ड-क्लास स्टैंडर्ड्स के अनुसार होगा। भारत के मौजूदा प्लांट्स जैसे कुडनकुलम, तरापुर, कैगा दशकों से सुरक्षित चल रहे हैं, तो बिहार में भी वैसा ही स्तर होगा।अब फायदों की बात करें – यह प्लांट सिर्फ बिजली नहीं देगा, बल्कि पूरा ट्रांसफॉर्मेशन लाएगा। हजारों जॉब्स क्रिएट होंगे – निर्माण चरण में 10,000+ लोगों को काम मिलेगा, ऑपरेशन में परमानेंट स्किल्ड पोजीशन्स। लोकल युवाओं को nuclear technology में ट्रेनिंग मिलेगी, जो हाई-पेइंग करियर खोलेगी। इंडस्ट्रीज को सस्ती और बिना रुकावट वाली बिजली मिलेगी, जो मैन्युफैक्चरिंग, आईटी हब्स, स्टील प्लांट्स को आकर्षित करेगी। बिहार का इंडस्ट्रियलाइजेशन तेज होगा, इकोनॉमी ग्रो करेगी, और राज्य एनर्जी इंडिपेंडेंट बनेगा।पर्यावरण के नजरिए से भी यह क्लीन एनर्जी है – ऑपरेशन में जीरो कार्बन एमिशन, क्लाइमेट चेंज से लड़ने में मदद करेगा। भारत का कुल लक्ष्य है 2030 तक 500 GW नॉन-फॉसिल फ्यूल से, और nuclear इसमें बड़ा रोल प्ले करेगा। बिहार जैसे डेवलपिंग स्टेट के लिए यह परफेक्ट है, क्योंकि base load power देता है, जो सोलर-विंड जैसे इंटरमिटेंट सोर्सेस नहीं दे सकते।गवर्नमेंट लेवल पर पूरा उत्साह है। सीएम नीतीश कुमार ने खुद राजौली साइट का इंस्पेक्शन किया था रिजर्वॉयर के साथ, जो कमिटमेंट दिखाता है। सेंटर ने Nuclear Energy Mission लॉन्च किया बजट में, और स्टेट्स को पार्टिसिपेट करने के लिए प्रोत्साहित कर रहा है। मिथ्स के बारे में भी जागरूकता फैलानी पड़ेगी – मॉडर्न nuclear plants बहुत सुरक्षित हैं, सख्त रेगुलेशन्स हैं, वेस्ट मैनेजमेंट एडवांस्ड टेक्नोलॉजी से होता है।अगर यह प्रोजेक्ट सफल हुआ, तो बिहार दूसरे nuclear plants के लिए मॉडल बन सकता है। फ्यूचर में कई यूनिट्स अलग-अलग जिलों में आ सकती हैं। यह सिर्फ पावर नहीं, बल्कि गर्व की बात है – बिहार जो पहले एनर्जी डेफिसिट स्टेट था, अब क्लीन एनर्जी लीडर बन सकता है।कुल मिलाकर, यह बिहार के लिए ऐतिहासिक पल है। अब फाइनल साइट सिलेक्शन और अप्रूवल्स पेंडिंग हैं, लेकिन दिशा साफ है – उज्ज्वल, शक्तिशाली भविष्य की ओर। हमें गर्व महसूस होना चाहिए कि हमारा राज्य nuclear map पर आ रहा है!