After Oil and Gas, Will Iran Now Shut Down the Internet? A Threat Looms Over Networks in India and Other Countries Published By Anupam Nath मार्च २०२६ में मिडिल ईस्ट का युद्ध अब केवल तेल और गैस तक सीमित नहीं रह गया है। ईरान-इजरायल (और अमेरिका समर्थित) संघर्ष ने पहले Strait of Hormuz को बंद करके ऊर्जा संकट पैदा कर दिया था, अब वही रास्ता वैश्विक इंटरनेट के लिए भी बड़ा खतरा बन रहा है। समुद्र के नीचे बिछी fiber optic cables, जो दुनिया के लगभग ९९ प्रतिशत अंतरराष्ट्रीय इंटरनेट डेटा को ले जाती हैं, Strait of Hormuz और Bab al-Mandeb Strait (लाल सागर में) से गुजरती हैं। ईरान ने Hormuz को प्रभावी रूप से ब्लॉक कर दिया है और हूती (ईरान समर्थित) लाल सागर में जहाजों पर हमले फिर से शुरू कर रहे हैं। दोनों जगह युद्ध क्षेत्र बन गए हैं। अगर इन cables को नुकसान पहुंचा तो बैंकिंग, डिजिटल पेमेंट, ऑनलाइन काम, वीडियो कॉल, AI सेवाएं सब प्रभावित हो सकती हैं। भारत जैसे देशों के लिए, जो इन रास्तों पर बहुत निर्भर हैं, यह बहुत बड़ा संकट है।ये submarine cables हजारों किलोमीटर लंबी होती हैं और समुद्र तल पर बिछी रहती हैं। रिपोर्ट्स के अनुसार लाल सागर से १७ प्रमुख cables गुजरती हैं जो यूरोप, एशिया और अफ्रीका को जोड़ती हैं – ये वैश्विक डेटा ट्रैफिक का १८-२० प्रतिशत संभालती हैं। Strait of Hormuz से गुजरने वाली cables में AAE-1, FALCON, Gulf Bridge International और Tata TGN Gulf जैसी प्रमुख हैं, जो सीधे भारत के अंतरराष्ट्रीय इंटरनेट कनेक्शन को मजबूत बनाती हैं। Hormuz का सबसे संकरा हिस्सा केवल २०० फीट गहरा है, इसलिए cables को नुकसान पहुंचाना या गलती से कट जाना आसान हो सकता है। युद्ध के कारण repair ships भी सुरक्षित नहीं जा सकतीं, जैसे २०२४ में लाल सागर में हुए घटनाओं में महीनों लग गए थे मरम्मत में।अब स्थिति यह है कि दोनों chokepoints – Strait of Hormuz और Bab al-Mandeb – एक साथ युद्ध क्षेत्र बन गए हैं, जो पहले कभी नहीं हुआ। ईरान ने mines बिछाने की शुरुआत की खबरें हैं, हूती जहाजों पर हमले कर रहे हैं। Meta ने हाल ही में 2Africa Pearls प्रोजेक्ट (जो Gulf, पाकिस्तान, भारत को जोड़ता है) के Persian Gulf हिस्से पर काम रोक दिया और Force Majeure घोषित किया क्योंकि अब सुरक्षित नहीं रहा। Alcatel Submarine Networks ने भी कहा कि Persian Gulf में अब काम नहीं कर सकते। ये cables Gulf में बने बड़े data centers (Amazon, Microsoft, Google के UAE और सऊदी अरब में) को जोड़ती हैं – अगर कट गईं तो AI सेवाएं, cloud computing, वैश्विक ट्रेडिंग सब प्रभावित होगा।भारत के लिए यह खतरा बहुत गंभीर है। हमारी अंतरराष्ट्रीय bandwidth का बड़ा हिस्सा इन रास्तों से आता है। अगर cables को नुकसान हुआ तो इंटरनेट स्पीड बहुत धीमी हो जाएगी या कुछ हिस्सों में पूरी तरह outage आ सकता है – जैसा २०२४-२०२५ में लाल सागर cuts से भारत, पाकिस्तान, UAE में स्पीड बहुत कम हो गई थी। बैंक ट्रांजेक्शन रुक सकते हैं, UPI, ऑनलाइन शॉपिंग, स्टॉक मार्केट ट्रेडिंग ठप हो सकती है। घर से काम, शिक्षा, मनोरंजन सब प्रभावित होगा। Gulf में बड़े data centers हैं जो AI और cloud सेवाएं देते हैं – उनका कनेक्शन टूटने से वैश्विक AI क्रांति भी रुक सकती है, भारत के स्टार्टअप और IT सेक्टर को भारी झटका लगेगा।विशेषज्ञ कह रहे हैं कि यह खतरा गलती से भी हो सकता है – जैसे किसी जहाज का एंकर drag करके cable काट दे या mine explosion से। Sabotage का भी डर है क्योंकि ईरान ने महत्वपूर्ण infrastructure को निशाना बनाने की धमकियां दी हैं। लाल सागर में पहले से हूती हमलों से cables क्षतिग्रस्त हुई थीं, अब Hormuz भी जुड़ गया तो दोहरी chokepoint संकट बन गया है। मरम्मत असंभव हो जाएगी क्योंकि विशेष ships युद्ध क्षेत्र में नहीं जा सकतीं। अगर एक बार कई cables कट गईं तो हफ्तों या महीनों तक व्यवधान चल सकता है – वैश्विक अर्थव्यवस्था को खरबों का नुकसान हो सकता है।दुनिया अब समझ रही है कि इंटरनेट geopolitical तनाव में कितना नाजुक है। Meta, Google जैसी कंपनियों ने लाल सागर के जोखिम से पहले ही देरी की थी, अब Hormuz भी असुरक्षित है। विकल्प ढूंढने पड़ रहे हैं – Saudi Arabia से overland cables या अन्य रास्ते, लेकिन वे महंगे और समय लेने वाले हैं। भारत को भी अपनी इंटरनेट resilience बढ़ानी होगी – घरेलू data centers बढ़ाओ, satellite internet (Starlink जैसे) पर ध्यान दो, और नए landing points (जैसे दक्षिण-पूर्व एशिया से cables) लाओ। युद्ध ने साबित कर दिया कि तेल-गैस के साथ bandwidth भी हथियार बन सकता है।यह संकट हमें सिखा रहा है कि डिजिटल infrastructure को ऊर्जा की तरह सुरक्षित, विविध और संरक्षित करना होगा। सरकारों और कंपनियों को मिलकर नए रास्ते प्लान करने चाहिए, जैसे Arctic routes या Pacific bypass। भारत में TRAI और DoT को सतर्क रहना होगा, emergency bandwidth प्लान तैयार रखने होंगे। आम आदमी के लिए इसका मतलब है कि कल सुबह उठो तो इंटरनेट न चले तो हैरान मत होना – यह मिडिल ईस्ट युद्ध का नया प्रभाव हो सकता है। बैंकिंग ऐप्स बंद, सोशल मीडिया ऑफ, ऑनलाइन क्लास रद्द – सब संभव है।निष्कर्ष में, तेल और गैस के बाद अब इंटरनेट पर भी ईरान के संघर्ष से खतरा मंडरा रहा है। Strait of Hormuz और Bab al-Mandeb के undersea cables दुनिया के डिजिटल backbone हैं और अब दोनों युद्ध क्षेत्र में हैं। भारत सहित एशिया, यूरोप, अफ्रीका सब प्रभावित हो सकते हैं – outage, धीमी स्पीड, आर्थिक नुकसान। अब तैयारी का समय है – रास्ते विविध करें, विकल्पों में निवेश करें और उम्मीद करें कि यह युद्ध जल्दी खत्म हो। वरना हमारी डिजिटल जिंदगी भी युद्ध का मैदान बन जाएगी। जुड़े रहें, सतर्क रहें!