India's Electricity Demand by 2035: How AI Data Centres and Green Hydrogen Will Shape the Future Published By Anupam Nath . Introduction: भारत में तेजी से बढ़ेगी बिजली की मांगभारत तेजी से आर्थिक विकास की ओर बढ़ रहा है। देश में Industrialisation, Urbanisation, Digital Technology और Electric Vehicles का इस्तेमाल लगातार बढ़ रहा है। इसके साथ ही बिजली की जरूरत भी बढ़ती जा रही है। आने वाले वर्षों में बिजली केवल घरों, दुकानों और कारखानों तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि Artificial Intelligence (AI), Data Centres और Green Hydrogen जैसे नए क्षेत्रों की Growth में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।ETEnergyworld में प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार, S&P Global का अनुमान है कि 2025 से 2035 के बीच भारत की Electricity Demand लगभग 5.56% की वार्षिक दर से बढ़ सकती है, जबकि कुल Energy Demand की वृद्धि दर लगभग 2.47% रहने का अनुमान है। इससे पता चलता है कि भारत की Energy Consumption में Electricity की भूमिका लगातार मजबूत होगी। �ETEnergyworld.comयह बदलाव भारत की Economy, Power Infrastructure और Renewable Energy Sector के लिए नए अवसरों के साथ कुछ महत्वपूर्ण चुनौतियां भी लेकर आएगा।2. Electricity Demand बढ़ने के प्रमुख कारणभारत में बिजली की खपत बढ़ने के पीछे कई कारण हैं। इनमें Industrial Growth, बढ़ती घरेलू जरूरतें, Digital Services और Transportation का Electrification प्रमुख हैं।जैसे-जैसे लोगों की Income बढ़ती है, वैसे-वैसे Air Conditioners, Refrigerators, Washing Machines और अन्य Electrical Appliances का इस्तेमाल बढ़ता है। गर्मी के मौसम में Cooling Requirements बढ़ने से बिजली की मांग पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है।इसके अलावा, नए Industrial Parks, Manufacturing Units, Commercial Buildings और Urban Infrastructure को भी बड़ी मात्रा में बिजली की आवश्यकता होती है।Electric Vehicles (EVs) की बढ़ती संख्या भी Electricity Demand को प्रभावित करेगी। पेट्रोल और डीजल से चलने वाले वाहनों की जगह जब Electric Vehicles इस्तेमाल किए जाएंगे, तब Charging Infrastructure के लिए अधिक बिजली की जरूरत होगी।इस तरह भारत में Electricity Demand का बढ़ना केवल Population Growth का परिणाम नहीं है, बल्कि देश की बदलती Economy और Technology का भी संकेत है।3. AI Data Centres बनेंगे बिजली की मांग का बड़ा स्रोतआज दुनिया में Artificial Intelligence का इस्तेमाल तेजी से बढ़ रहा है। AI Chatbots, Cloud Computing, Online Banking, Video Streaming और Digital Platforms के संचालन के लिए बड़े Data Centres की जरूरत होती है।Data Centre ऐसी सुविधा होती है जहां हजारों Servers, Storage Systems और Networking Equipment के माध्यम से Digital Information को Store, Process और Transfer किया जाता है।इन Servers को लगातार बिजली की जरूरत होती है। इसके अलावा, Equipment को गर्म होने से बचाने के लिए Cooling Systems भी लगातार काम करते हैं।भारत में AI Services और Cloud Computing का विस्तार होने के साथ नए Data Centres स्थापित किए जाने की संभावना है। इन सुविधाओं को Reliable Electricity Supply की आवश्यकता होगी, क्योंकि बिजली बाधित होने से Digital Services प्रभावित हो सकती हैं।Data Centres की बढ़ती संख्या Power Sector के लिए एक नया Business Opportunity भी पैदा करेगी। बिजली कंपनियों, Renewable Energy Developers और Energy Storage Providers को इस क्षेत्र में निवेश के नए अवसर मिल सकते हैं।हालांकि, Data Centres की वास्तविक बिजली खपत उनके आकार, Technology, Server Utilisation और Cooling Efficiency पर निर्भर करेगी।4. Green Hydrogen से बढ़ेगी Electricity ConsumptionGreen Hydrogen भविष्य की Clean Energy Technology में महत्वपूर्ण स्थान रखता है। इसका उत्पादन Renewable Electricity की सहायता से Water Electrolysis प्रक्रिया द्वारा किया जा सकता है।इस प्रक्रिया में Electrolyser की मदद से पानी को Hydrogen और Oxygen में विभाजित किया जाता है। यदि इसमें इस्तेमाल होने वाली बिजली Renewable Sources से प्राप्त हो, तो उत्पादित Hydrogen को Green Hydrogen कहा जाता है।Green Hydrogen का इस्तेमाल कई Industrial Applications में किया जा सकता है। उदाहरण के लिए, Steel Manufacturing, Fertiliser Production, Refining और कुछ कठिन Industrial Processes में यह Fossil Fuels के विकल्प के रूप में उपयोगी हो सकता है।लेकिन Green Hydrogen के उत्पादन के लिए बड़ी मात्रा में Electricity की आवश्यकता होती है। इसलिए यदि भारत में इसका उत्पादन बड़े पैमाने पर बढ़ता है, तो बिजली की मांग भी बढ़ सकती है।इस क्षेत्र की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि Renewable Electricity कितनी उपलब्ध है, Electrolysers कितने Efficient हैं और Hydrogen Production की कुल लागत कितनी कम हो पाती है।5. 2035 तक 240 TWh बिजली खपत का अनुमान क्या बताता है?S&P Global के अनुसार, भारत में Data Centres और Green Hydrogen Production से जुड़ी संयुक्त Electricity Consumption 2035 तक लगभग नौ गुना बढ़कर 240 Terawatt-hours (TWh) तक पहुंच सकती है। ETEnergyworld.comयहां एक महत्वपूर्ण बात समझना जरूरी है। यह आंकड़ा पूरे भारत की Electricity Consumption का अनुमान नहीं है। यह विशेष रूप से Data Centres और Green Hydrogen Production से जुड़ी संयुक्त बिजली खपत के संदर्भ में दिया गया है।एक Terawatt-hour बिजली की एक बड़ी इकाई है, जो एक अरब Kilowatt-hours के बराबर होती है।यदि इन दोनों क्षेत्रों में अनुमान के मुताबिक Growth होती है, तो भारत को उनके लिए पर्याप्त Electricity Generation, Transmission और Distribution Infrastructure तैयार करना होगा।इसके लिए बिजली उत्पादन क्षमता बढ़ाने के साथ-साथ Power Grid को मजबूत करना और जरूरत के समय बिजली उपलब्ध कराने की व्यवस्था करना भी जरूरी होगा।6. Renewable Energy और Energy Storage की भूमिकाबढ़ती Electricity Demand को पूरा करने के लिए केवल नए Power Plants स्थापित करना पर्याप्त नहीं होगा। भारत को अपने Energy Mix में Renewable Energy की भूमिका भी मजबूत करनी होगी।Solar Energy और Wind Energy इस दिशा में महत्वपूर्ण विकल्प हैं। भारत में Solar Power Projects, Wind Farms और Rooftop Solar Systems का विस्तार Clean Electricity की उपलब्धता बढ़ाने में मदद कर सकता है।लेकिन Renewable Energy के सामने एक चुनौती है। Solar Power का उत्पादन मुख्य रूप से धूप की उपलब्धता पर निर्भर करता है, जबकि Wind Power का उत्पादन हवा की गति के अनुसार बदलता रहता है।इस समस्या को कम करने के लिए Battery Energy Storage Systems और Pumped Storage Projects उपयोगी हो सकते हैं। ये अतिरिक्त बिजली को Store करके जरूरत के समय उपलब्ध कराने में मदद करते हैं।इसके साथ ही, Smart Grids, Demand Forecasting और बेहतर Grid Management की आवश्यकता होगी, ताकि बिजली का उत्पादन और खपत संतुलित रह सके।7. Power Infrastructure को मजबूत करना क्यों जरूरी है?बिजली की मांग बढ़ने पर Generation Capacity के साथ Transmission और Distribution Networks का विस्तार भी जरूरी है।Transmission Lines बिजली को Power Plants से अलग-अलग क्षेत्रों तक पहुंचाती हैं, जबकि Distribution Networks इसे घरों, दुकानों और Industries तक पहुंचाते हैं।यदि इन Networks की क्षमता पर्याप्त नहीं होगी, तो कुछ क्षेत्रों में बिजली की कमी, Transmission Congestion और Supply Reliability से जुड़ी समस्याएं पैदा हो सकती हैं।इसलिए Power Sector में Long-term Planning, Modern Equipment, Grid Automation और Infrastructure Investment महत्वपूर्ण होंगे।Distributed Generation भी इस दिशा में उपयोगी हो सकता है। इसमें बिजली का उत्पादन उपभोक्ताओं के नजदीक किया जाता है, जैसे Rooftop Solar Systems और स्थानीय स्तर पर स्थापित Renewable Energy Projects।S&P Global के अनुसार, भारत में Distributed Generation का हिस्सा 2025 के लगभग 13% से बढ़कर 2035 तक करीब 16% हो सकता है। ETEnergyworld.com8. भारत के लिए नए Business और Employment OpportunitiesElectricity Demand में बढ़ोतरी से कई Industries को फायदा मिल सकता है। Renewable Energy Projects, Power Transmission Equipment, Battery Storage, Smart Meters और Energy Management Technologies में निवेश के अवसर बढ़ सकते हैं।इसके अलावा, Green Hydrogen Production और Data Centre Infrastructure से जुड़े क्षेत्रों में Skilled Professionals की मांग भी बढ़ सकती है।Electrical Engineers, Renewable Energy Specialists, Data Centre Technicians और Power System Experts जैसे Professionals के लिए नए Career Opportunities पैदा हो सकते हैं।हालांकि, इन अवसरों का वास्तविक आकार Investment, Government Policies, Technology Costs और Market Demand पर निर्भर करेगा।भारत के लिए जरूरी होगा कि वह Infrastructure Development के साथ Skilled Workforce और Domestic Manufacturing को भी बढ़ावा दे।9. प्रमुख चुनौतियां और भविष्य की दिशाबढ़ती बिजली की मांग के साथ कुछ चुनौतियों पर ध्यान देना जरूरी है।पहली चुनौती है Affordable Electricity उपलब्ध कराना। बिजली उत्पादन और Infrastructure के विस्तार के लिए बड़े निवेश की जरूरत होगी।दूसरी चुनौती है Renewable Energy Integration। Solar और Wind Power को Grid में प्रभावी ढंग से शामिल करने के लिए Storage और Flexible Power Generation की जरूरत पड़ सकती है।तीसरी चुनौती है Environmental Sustainability। यदि बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए Fossil Fuels पर निर्भरता अधिक बनी रहती है, तो Carbon Emissions कम करने का लक्ष्य प्रभावित हो सकता है।इसके अलावा, Data Centres की Cooling Requirements, Water Usage और Energy Efficiency पर भी ध्यान देना होगा।भारत को ऐसी Energy Strategy की आवश्यकता होगी जो Reliability, Affordability और Sustainability के बीच संतुलन बनाए रखे।10. Conclusion: भारत का भविष्य अधिक Electric होगा2035 तक भारत का Energy Sector महत्वपूर्ण बदलावों से गुजर सकता है। Industrial Growth, Electric Vehicles, AI Data Centres और Green Hydrogen बिजली की मांग बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।S&P Global के अनुमान के अनुसार, Electricity Demand की Growth Rate कुल Energy Demand की तुलना में अधिक रह सकती है। यह भारत की Economy में Electrification की बढ़ती भूमिका को दर्शाता है। ETEnergyworld.comआने वाले वर्षों में भारत के लिए सबसे बड़ी चुनौती केवल अधिक बिजली पैदा करना नहीं, बल्कि उसे Reliable, Affordable और Cleaner तरीके से उपभोक्ताओं तक पहुंचाना होगा।यदि देश Renewable Energy, Energy Storage, Modern Transmission Networks और Efficient Technologies में सही समय पर निवेश करता है, तो बढ़ती बिजली की मांग को आर्थिक विकास के अवसर में बदला जा सकता है।भारत की Digital Economy और Clean Energy Transition का भविष्य काफी हद तक इस बात पर निर्भर करेगा कि देश अपनी बढ़ती Electricity Demand को कितनी कुशलता से पूरा कर पाता है।